कोविड-19 महामारी में रखे मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान

जबलपुर| 10 अक्टूबर मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शांतम प्रज्ञा आश्रम में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस वर्ष की थीम “मेंटल हेल्थ फॉर आल ग्रेटर इन्वेस्टमेंट ग्रेटर एक्सेस” है।
इस अवसर पर क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट मुकेश कुमार सेन ने बताया कि पिछले 10 वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो यह साफ पता चलता है कि मानसिक रूप से बीमार लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। वहीं, कोरोना महामारी की दस्तक ने इन आंकड़ों में और इजाफा किया है। कोरोना महामारी ने दुनिया को कई सबक भी दिए। महामारी के कारण पैदा हुए भय ने हमारे मन-मस्तिष्क को सीधे तौर पर प्रभावित किया। लॉकडाउन के दौरान कुछ दिनों तक लोग अपने घरों में बंद होकर सबकुछ ठीक होने का इंतजार करते रहे। बाजार, रोजगार, समाज सब पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। कंटेनमेंट जोन, आइसोलेशन सेंटर, कोविड वॉर्ड, होम आइसोलेशन जैसे शब्दों ने मानसिक चेतना को अस्थिर कर दिया। इन सबका प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ा जिससे आम जनमानस के व्यवहार में चिड़चिड़ाहट,तनाव,अवसाद, नशा के साथ साथ अन्य मनोवैज्ञानिक परिवर्तन देखे जा रहे है जिससे जनमानस में तेजी से मानसिक बीमारियां बढ़ रही है। साथ ही लोगों की जीवनशैली में भी काफी बदलाव देखने मिल रहे है। पिछले कुछ महीनों में आम नागरिकों, स्वास्थ्यकर्मियों, छात्रों, शिक्षकों लगभग सभी को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।साथ ही पूर्व में उपचार ले रहे मानसिक रोगियों में लॉकडाउन के दौरान सामाजिक अलगाव की स्थिति बढ़ी है।तेजी से बदलती दुनिया तथा सामाजिक परिवेश में मनोचिकित्सा की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।यदि हमारे परिवार व आसपास किसी व्यक्ति में किसी प्रकार का तनाव,अवसाद व अन्य मानसिक बीमारी के लक्षण नजर आते है तो हमें तुरंत मनोचिकित्सक से उपचार व मनोवैज्ञानिकों से परामर्श लेना चाहिए जिससे बीमारी के प्रारंभ में ही रोक लगाई जा सके।इस अवसर पर महेश पटेल राष्ट्रीय अध्यक्ष मानवाधिकार संघठन,एडवोकेट राकेश सेन,मीरा राय,संतोष अहिरवार,यश रंजन श्रीवास उपस्थित रहे।



