जबलपुर दर्पणमध्य प्रदेश

जिले के मझौली जनपद ग्राम पंचायत पड़वार में जमकर मचा भ्रष्टाचार

जबलपुर। जनपद पंचायत में बैठे सी.ई.ओ. राजीव तिवारी के कार्यकाल में जमकर मचा है भ्रष्टाचार नहीं हो रही है भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्यवाही

भ्रष्टाचार होने पर सक्षम अधिकारी भी नहीं कर पा रहे हैं कार्यवाही

एक तरफ सरकार चाहे वह केंद्र की सरकार हो या राज्य की सरकार हो मजदूरों के लिए बड़े-बड़े वादे तो कर रही है लेकिन जब जमीनी हकीकत देखी जाती है तो मजदूरों को आज भी परेशानियां झेलनी पड़ रही है ऐसा ही एक मामला ग्राम पंचायत पड़वार का है जहां पर मजदूरों को 4 साल पहले किए मजदूरी का पैसा नहीं मिला है और ना ही अब मनरेगा में कोई कार्य नहीं मिल रहा है जिसके कारण मजदूरों को काफी कुछ परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं इतना तक कि मजदूरों को यहां वहां से भीख मांग कर अपना पेट पालना पड़ रहा है

आखिर क्यों रोकी जा रही है मजदूरों की मजदूरी

जैसा कि आपको पता है कि इस वर्ष कोरोना जैसी महामारी के चलते मजदूरों को कितनी परेशानियां झेलनी पड़ी रही है लोगों को काम नहीं मिल पा रहे हैं घर में चूल्हे नहीं जल पा रहे मगर समझ में यह नहीं आ रहा है कि लोगों के 3 से 4 साल तक का पैसा मजदूरी का कैसे सरकार रोक कर रखी है यह सोचने वाली बात है लोगों को मजदूरी न मिलने से काफि परेशानियां झेलनी पड़ रही है और ना ही मनरेगा के कार्ड बनाए जा रहे हैं और ना ही मनरेगा में मजदूरों को कार्य दिया जा रहा है आखिर सरकार के तमाम वादे क्यों विफल नजर आते हैं क्या रोजगार सहायक श्वेता पाठक की मनमानी के कारण गरीब मजदूरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है रोजगार सहायक श्वेता पाठक से मजदूरी का पैसा मांगने गए मजदूरों को अभद्र व्यवहार कर कर क्यों भगा दिया जाता है ?
जिसकी शिकायत ग्राम वासियों द्वारा जबलपुर कलेक्टर , जिला पंचायत सीईओ और एसडीओ सिहोरा ग्राम पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार की तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान नहीं जा रहा है जिनके कारण आज काफी समस्याएं गरीब जनता को झेलनी पड़ रही है चाहे वह ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्य जिसकी शिकायत में क्षेत्र में बनी सीसी सड़कें एवं नालिया और गांव के अंदर बदबदाती गंदगी दिखाई दे रही है इस प्रकार ग्राम पंचायत पड़वार में भ्रष्टाचार हुआ है

आवास योजना में भी धांधली

गरीब लोगों से मकानों पर भी सचिव भीषम सिंह राजपूत द्वारा पैसे की मांग की जाती है और कुछ लोगों ने पैसे दिए भी हैं साथ ही आवास योजना में जो मजदूरी का पैसा आता है वह भी अभी तक कुछ लोगों को मिला नहीं उससे लगता है कि रोजगार सहायक श्वेता पाठक द्वारा भी अनियमितताएं की गई

मुक्तिधाम जैसे पवित्र स्थल को भी नहीं छोड़ा भ्रष्टाचारियों ने

मुक्तिधाम बनने के नाम पर 2 लाख 73 हजार की राशि स्वीकृत हुई जिसमें देखा गया कि अभी तक मुक्तिधाम का कार्य ही नहीं हुआ और राशि निकल चुकी है इन सभी अनियमितताएं की शिकायत ग्राम वाशियों ने कलेक्टर महोदय से की

सीएम हेल्पलाइन में शिकायत करने के बाद भी नहीं हो पा रही है कार्यवाही

कार्य पूर्ण होने के पहले ही निकाल लिए पैसे

ग्राम पंचायत के लोगों ने बताया कि ग्राम पंचायत में बहुत से कार्य ऐसे हुए हैं जैसे सीसी सड़क निर्माण हुआ नहीं और पैसे निकाल लिए गए रंगमंच बने नहीं और पैसे निकाल लिए गए नालियां नालियां बनी नहीं और पैसे निकाल लिए गए आंगनवाड़ी बाउंड्री वाल यह सभी विकास कार्य अधूरे पड़े हैं और कुछ विकास कार्य अभी चालू ही नहीं हुए लेकिन ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव भीषण राजपूत और रोजगार सहायक श्वेता पाठक सरपंच सुशील दहिया मिलकर ग्राम पंचायत पड़वार में जमकर भ्रष्टाचार की होली खेलते नजर आए

सूरदास की आंख को फोड़ने की बात सामने आई ताकि पेंशन मिल सके

जैसा कि आपको पता है कि ग्राम पंचायत में अपाहिज लोगों को भी सरकार की पेंशन का फायदा नहीं मिल पा रहा और ना ही वृद्ध बूढ़े लोगों को पेंशन मिल पा रही है आखिर क्यों हो रहे हैं अपाहिज और वृद्ध बूढ़ों को झेलनी पड़ रही परेशानी जबकि पेंशन मांगने गए सूरदास को आंख फोड़ने की की बात स्वयं सचिव विषम सिंह राजपूत ने सूरदास को कह डाली और यह भी कह दिया कि जब तुम्हारी दोनों आंखें फूट जायेंगे तब तुम को पेंशन दी जाएगी तो इस प्रकार का रवैया यह महसूस कराता है कि सचिव भीषम सिंह राजपूत और रोजगार सहायक श्वेता पाठक की दबंगई से ग्राम वासी परेशान हैं

आदिवासी कॉलोनी मैं गरीबों को नहीं मिला राशन

*राशन कार्ड ना होने पर सरकार से नहीं मिली किसी प्रकार की कोई मदद ग्राम पंचायत पड़वार में आदिवासी क्षेत्र एवं कॉलोनियां बसी हुई है जहां पर लोगों के पास राशन कार्ड ना होने के कारण उन्हें इस कोरोना काल जैसी बीमारी के समय पर भी सरकार से कोई भी सुविधाएं प्राप्त नहीं हुई ना ही मास्क मिला ना ही सैनिटाइजर और ना ही अनाज मिल पाया है जिसके कारण आप स्वयं वीडियो में देख सकते हैं लोग बता रहे हैं कि यहां वहां से भीख मांग कर उन्होंने अपना इस भीषण बीमारी काल में जीवन काट रहे है

सूर्यकांत पांचाली

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