अतिथि शिक्षकों के साथ अब मजाक सहन नहीं : पी.डी.खैरवार

राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम से सौंपा गया ज्ञापन
मण्डला-19 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर श्रीमती मीना मसराम के हाथों महामहिम राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आदेश निरस्त कराते हुए अतिथि शिक्षकों को काम पर तत्काल बुलाए जाने की मांग की गई है।
16 अक्टूबर 2020 को जिलाधीश कटनी मध्य प्रदेश की ओर से शिक्षक विहीन स्कूलों में शैक्षणिक कार्य हेतु शिक्षक नियुक्ति किये जाने हेतु जिले के प्राचार्यों को आदेश जारी किए गए हैं।जो प्रशासन की तानाशाही की ओर इंगित करता है।जो आदेश क्र.रमसा/2020/3807 जारी किया गया है। जिसका शासन की ओर से किसी भी प्रकार से या भविष्य में कोई भी वेतन भत्ता या मानदेय देय नहीं होगा।जिसकी स्वीकृति संबंधित से ले लिए जाने का उल्लेख भी है।आदेश में कहा गया है, कि उसी गांव के स्नातक और स्नातकोत्तर योग्यता धारी गांव के ही विद्यार्थी स्कूल के लिए निशुल्क अध्यापन कार्य करेंगे। अलबत्ता उन्हें मानसिक श्रम भुगतान के बजाय अनुभव प्रमाण पत्र दे दिया जाएगा।शायद यह योग्यता धारी जरूरतमंद बेरोजगारों के लिए लाली पाप के अलावा कुछ भी नहीं है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में आज भी लाखों अतिथि शिक्षक अपने आमंत्रण का इंतजार कर रहे हैं जिनकी संख्या सवा लाख से भी ऊपर है। इतनी बड़ी संख्या आज भी नियमितीकरण के लिए लगातार संघर्ष करते बाट जोह रही है,और तो और लाकडाउन काल के चलते पिछले सात माह से इनकी आमदनी शून्य भी है।
सरकार वर्तमान व पूर्व
वर्ती क्यों ध्यान नहीं दे रही है?यह बहुत बड़ा सवाल भी है।जबकि पूरे मध्यप्रदेश में दो वर्ष पूर्व में ही लगभग 3:50 लाख से अधिक रोजगार जरूरत मंद शिक्षित बेरोजगार अतिथि शिक्षक पद के लिए ऑनलाइन रजिस्टर्ड हैंं।जिनका अनदेखा करते हुए फ्रैश बेरोजगारों से आवेदन पत्र आमंत्रित कर उनको भी छलने की नीयत जारी है।इस ओर सरकार का बिल्कुल भी ध्यान नहीं है।माना जा रहा है, कि सरकार की नजरों में अतिथि शिक्षक कोई वोट बैंक नहीं हैं।जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में सरकार बदलने में अतिथि शिक्षकों व उनके समर्थकों के वोटबैंक की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
अतिथि शिक्षकों ने कहा है,कि कटनी कलेक्टर के द्वारा जारी आदेश को निरस्त कराया जाये।अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त कर शिक्षा को पटरी पर लाया जाये।लाकडाउन काल का मानदेय भुगतान किया जाये।यह भी चेताया गया है कि आज से तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं किये जाने की स्थिति में अतिथि शिक्षक परिवार मध्य प्रदेश सड़कों पर उतर जाएगा। अनिश्चितकालीन जन सत्याग्रह भी पिछले एक साल से निरंतर जारी भी है। जिसकी निरोधात्मक प्रतिक्रिया मध्य प्रदेश की 28 सीटों के लिए हाल ही में होने वाले उपचुनाव में सत्ता पक्ष को देखने को मिल सकती है।सरकार की भलाई इसी में है। ज्ञापन में मांग की गई है कि 3 दिवस के अंदर आदेश निरस्त करते हुए पहले से ही कार्य करते आ रहे और काम से बाहर कर दिए गये अतिथि शिक्षकों को जल्द बुलाया जाये।
ज्ञापन सौपने में गाइडलाइन का पालन करते हुए अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के संयोजक संस्थापक पी.डी.खैरवार,संगठन के पदाधिकारी उपासना सिंह, अतुल द्विवेदी, महेंद्र सोनी सहित बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक सामिल थे।



