मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

टीआरएस कॉलेज में भारत माता की प्रतिमा स्थापित

संघ की मूल विचारधारा का दिखा सबसे बड़ा उदाहरण

रीवा। किसी संगठन का अनुयाई और हितैषी होना अलग बात है, संस्कारित अंदाज में संगठन की मुल विचारधारा को यथार्थ में अंजाम देना हर किसी के लिए आसान नहीं है। अक्सर स्कूलों, कालेजों, सरकारी विभागों और बहुत सारे आयोजनों में भारत माता की जय जयकार बोलने वाले बहुतायत ऐसे लोग हैं जिन्होंने वास्तविक तौर पर भारत माता की प्रतिमा किसी शैक्षणिक संस्थानों में स्थापित नहीं देखी। राजनैतिक दखलंदाजी की वजह से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले शासकीय ठाकुर रणमतसिंह महाविद्यालय परिसर के अंदर और हरियाली से सराबोर गार्डन के बीच ऊंचाई पर भारत माता की भव्य और रमणीय प्रतिमा स्थापित है। सुरक्षा कवच के अंदर भारत माता की प्रतिमा टीआरएस कालेज ग्राउंड की तरफ नजर आती है। भारत माता की भव्य प्रतिमा को साफ सुथरा रखने के लिए बकायदे व्यवस्था बनाई गई थी। टीआरएस कॉलेज में पूर्व प्राचार्य ने सारे विरोध को दरकिनार करते हुए भारत माता की भव्य प्रतिमा स्थापित करवाई थी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लिए भारत माता का विशिष्ट और सबसे ऊंचा स्थान है। इसी मूल भावना को यथार्थ में लागू करने का साहस दिखाने वाले जमीनी कार्यकर्ता को राजनैतिक सुनियोजित हमलों का शिकार बनाया गया। भारत माता की भव्य प्रतिमा को कालेज कैम्पस में स्थापित कराने वाले पूर्व प्राचार्य पर जनसंघीय होने का आरोप तक राजनैतिक दलों से जुड़े लोगों ने लगाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा का इससे बड़ा उदाहरण शायद ही किसी शिक्षा के मंदिर में देखने को मिलें।

हमेशा राजनैतिक लक्ष्य बनकर रहे हैं पूर्व प्राचार्य
आमतौर पर लोगों का यह मानना है कि शिक्षा और राजनीति की पाठशाला में बड़ा अंतर होता है। लेकिन टीआरएस एक ऐसा सरकारी कालेज है, जिसका प्रभाव बराबर विंध्य की सियासत में देखने को मिला है। टीआरएस कालेज में ऐसे गिनती के पूर्व प्राचार्य हैं, जिनके प्रबंधन का लोहा सभी मानते हैं। कांग्रेसी जमीन पर पैदा होने वाले उपेक्षित युवा लीडर ने पाला बदला और भगवा धारण कर लिया। रीवा जिले के सीनियर लीडर्स को पीछे छोड़ते हुए टाप क्लास में पहुंचने वाले शक्ति मान बन गए। पंद्रह सालों में अपने आपको चालाकी के साथ प्रायोजित विकास पुरुष बनाने वाले लीडर ने पहली बार विधायक बनते ही राजनैतिक सूटकेस मैनेजमेंट के सहारे पूरी ताकत से छलांग लगाई और मंत्री बन गए। अपने इस लाजवाब राजनैतिक सफर के दौरान अहं से परिपूर्ण विकास पुरुष ने सबको अपने पीछे करते हुए ऐलानिया संघीय विचारधारा के कट्टर सर्मथको में शुमार पूर्व प्राचार्य को निरंतर टारगेट किया। इसके बाद भी राजनैतिक उतार चढ़ाव से परिचित पूर्व प्राचार्य ने निरंतर हमले होने के बाद भी बराबर संयम में रहे।

और संघ ने दिया झटका फिर भी संभलें नहीं साहब?
भारतीय जनता पार्टी और संगठन में कोई कितना भी बड़ा पद और पावर पा जाए पर वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्पष्ट तौर पर उपेक्षा नहीं कर सकता है। विकास पुरुष ने कुछ समय पहले ही संघ की जोरदार दखल ने जोरदार राजनैतिक झटका दिया था। इसके बाद भी साहब ने अपनी हरकतों से तौबा नहीं की है। यदि किसी मंत्री, सांसद, विधायक अथवा संगठन मंत्री बनने वाले को यह लगता है कि वह संघ की मूल भावना को समाज के बीच पहुंचाने वाले लोगों के ऊपर हमेशा सितम ढाते रहेंगे और कोई कुछ बोलेगा नहीं। इस तरह की मानसिकता रखने वाले नेताओं को अचानक कब शिकस्त का सामना करना पड़ जाए, यह कोई नहीं जानता है। हाल ही में विकास विकास पुरुष ने टीआरएस कालेज के पूर्व प्राचार्य को निलंबित करवाया है। उन्हीं के खिलाफ साल 2019 में विकास पुरुष ने अपने भारी दबाव की वजह से हरिजन थाने में एट्रोसिटी एक्ट दर्ज करवा दिया था। जिससे पूर्व प्राचार्य अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा के नए कुलपति के लिए दावेदारों में शामिल ना हो पाएं। पूर्व प्राचार्य को फर्जी एट्रोसिटी एक्ट में फंसाने के बाद विकास पुरुष, रीवा सांसद और सेमरिया विधायक कुलपति बनाने के लिए तत्कालीन राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात करने राजभवन पहुंचे। पूर्व मंत्री ने कांग्रेसी पष्ठभूमि से जुड़े पूर्व कुलपति प्रो रहस्य मणि मिश्रा, डॉ सुनील तिवारी सहित एक अन्य का नाम राज्यपाल को सौंपा। यह देखते ही राज्यपाल राज्यपाल ने मौके पर ही विकास पुरुष को फटकार लगाते हुए संघ के वरिष्ठ अमले को अवगत कराया था। उच्च स्तर तक संघ से जुड़े लोगों को निशाना बनाने वाले विकास पुरुष के लिए बाजी चली गई। जिसके कारण भाजपा की चौथी मध्य प्रदेश सरकार से विकास को बाहर करने का फरमान जारी कर दिया गया। एक झटके में संघ ने विकास पुरुष का सपना चकनाचूर कर हाशिए पर ला दिया। लेकिन बेलगाम विकास पुरुष जरा सा भी सचेत नहीं हुए हैं। एक बार फिर विकास के राजनैतिक पावर के अहंकार ने टीआरएस कालेज में बवंडर मचा दिया है, इधर संघ भी आमतौर पर न्यूट्रल रहते हुए अचानक धमाका कर देता है।

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