मध्य प्रदेशरीवा दर्पण

अल्ट्राटेक और जेपी सीमेंट के कारण पर्यावरण खराब

सड़कों के अगल बगल मौजूद आशियानों पर डस्ट हावी
रीवा दर्पण। आवोहवा में जहर खोल रही है अल्ट्राटेक- जेपी सीमेंट फैक्टियों के आसपास चार सौ से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित होते हैं। इस भीड़ में ऐसे स्टोन क्रेशर भी बहुतायत संचालित हो रहे हैं जिनके पास जिला प्रशासन अथवा खनिज विभाग से किसी तरह की अनुमति नहीं है। रीवा और सतना जिले के सीमाई इलाकों में संचालित होने वाले स्टोन क्रेशरो पर शासन प्रशासन के नियम कायदे कोई अहमियत नहीं रखते हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड और जेपी सीमेंट लिमिटेड के आसपास संचालित होने वाले स्टोन क्रेशरो पर खनिज विभाग अथवा जिला प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। चौबीस घंटे हैवी मशीनों से गिट्टी का काम बराबर होता है। बेला की तरफ से अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड होते हुए जेपी सीमेंट प्लांट तक पहुंचने वाली सड़कों पर हर समय जानलेवा डस्ट बिछी रहती है। जिला पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस पूरे खेल का सबसे अहम किरदार है। लगभग चालीस गांवों में रहने वाली ग्रामीण जनता के लिए शुद्ध आवोहवा हराम हो गई है। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड बेला के मुख्य द्वार के सामने भारी वाहनों का रेला लगा रहता है, इनकी निरंतर आवाजाही के कारण डस्ट का असर हमेशा सातवें आसमान पर रहता है। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड बेला और जेपी सीमेंट प्लांट के आसपास लगभग चार सौ अधिक स्टोन क्रेशर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें आधे से ज्यादा ऐसे स्टोन क्रेशर हैं जो पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से संचालित किए जा रहे हैं। दोनों सीमेंट फैक्टियों से लगे गांवों में रहने वाले लोगों के बीच सांस संबंधी बीमारी का तेजी से विस्तार हुआ है।

डस्ट का असर सीमित करने कोई इंतजाम यहां नहीं?
जिला पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियम कायदों की मौजूदगी बेसक कागजों में परस्पर नजर आती है, लेकिन स्टोन क्रेशर वाले न स्थानों पर कोई भी नियम कायदे मायने नहीं रखते हैं। बहुसंख्यक स्टोन क्रेशरो में दम तोड़ने नियम कायदों का नजारा आप किसी भी समय यहां पर देख सकते हैं। अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड बेला और जेपी सीमेंट प्लांट रीवा के आसपास का पूरा इलाका स्टोन क्रेशरो के लिए महफूज बताया जाता है। दोनों सीमेंट फैक्टियों के करीब संचालित होने वाले प्रत्येक स्टोन क्रेशर से हर महीने जिला पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला खनिज विभाग और राजस्व विभाग का कमीशनबाज अमला अपना नजराना वसूल करता है। स्टोन क्रेशर संचालन के दौरान किसी भी नियम कायदे का पालन न करना पड़े, इसके लिए स्टोन क्रेशर संचालकों ने संबंधित विभागों का माहवार तय कर रखा है। सूत्रों ने बताया कि अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड बेला और जेपी सीमेंट एरिया के आसपास संचालित स्टोन क्रेशरो में विधायकों और नेताओं का दबदबा भी बराबर कायम देखा जाता है। किसी भी स्टोन क्रेशर में आपको दूर दूर तक बाउंड्री वॉल नजर नहीं आएगी। यही वजह है कि स्टोन क्रेशर से डस्ट के साथ निकलने वाला धुआं सड़कों पर बराबर कायम रहता है। एक भी स्टोन क्रेशर में फव्वारे की व्यवस्था नहीं कराई गई है, जिससे कि समय-समय पर सिंचाई करके डस्ट के असर को बैठाया जा सकें। इतना ही नहीं सीमेंट प्लांट के आसपास भी सड़कों पर पानी नजर नहीं आता है।

तमाशबीन बन गया जिले का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
सीमेंट फैक्टियों के साथ साथ सभी स्टोन क्रेशरो में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम करवाने की जिम्मेदारी जिस प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पर रहती है, वही अपना हिस्सा लेने के बाद प्रदूषण की गुमराह करने वाली रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करवाता है। नौबस्ता मंडल के अध्यक्ष प्रदीप त्रिपाठी ने कहा कि चालीस गांवों में रहने वाले हजारों लोगों के जीवन का कोई मोल नहीं है। सुबह से आसमान तक छा जाने वाली डस्ट का बोलबाला यहां पर बराबर देखने को मिलता है। कुल मिलाकर जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अमला तमाशबीन बनकर केवल कागजी खानापूर्ति को पूरी जिम्मेदारी के साथ अंजाम देने में लगा रहता है।

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