कलेक्ट्रेट के बाबूओं ने कर दिया षड्यंत्र

सतना दर्पण। कलेक्टर को गुमराह कर षड्यंत्रकरियो ने कलेक्टर के फैसले को बदल दिया, और कलेक्टर को पता भी नही चला, जानकारी के मुताबिक विगत दिनों कलेक्टर की अध्यक्षता में पटाखा व्यवसायियों की एक बैठक हुई, इस बैठक में आयुक्त नगर निगम के साथ-साथ जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, बैठक में निर्णय लिया गया कि इस बार पटाखा व्यवसायियों को नगर निगम अस्थाई दुकानें बना कर देगा और एक दुकानदार से ₹4000 लिए जाएंगे, कलेक्टर के इस प्रस्ताव का पटाखा व्यवसायियों के साथ के साथ अन्य लोगों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया था, लेकिन बैठक खत्म होने बाद कलेक्ट्रेट के बाबुओं ने पटाखा व्यवसाय के दलालो से मिकलर कलेक्टर के निर्णय को बदल दिया। इन्होंने निर्णय यह लिया गया कि पटाखा दुकानें अब नगर निगम नही बनाएगा, निजी व्यक्ति से बनवाई जाएगी। नगर निगम 4000 में दुकान बनाकर दे रहा था निजी व्यक्ति 13000 में दे रहा है। बाबूओऔर दलालो का गठजोड़ पटाखा व्यवसाइयों को लूट रहा है। अपने आपको पटाखा संघ का स्वम्भू अध्यक्ष बताने वाला गुड्डा शुक्ल उर्फ रमेश निजी दुकानें बनवाकर 13000 रुयये पटाखा व्यवसाइयों से वर्षो से वसूल रहा है। पुनः इसे ही यह लूटने का दायित्व दे दिया गया। तथा गुड्डा व्यवसाईयों को पटाखे लेने पर भी मजबूर करता है गुड्डा का एक पटाखा गोदाम भी है। इस खेल में कई अधिकारी और सफेदपोश नेता भी शामिल है।



