मधुमक्खी पालन विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न

कटनी दर्पण। जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर की संचालक विस्तार सेवाएं डॉ श्रीमती ओम गुप्ता के निर्देशानुसार वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ ए.के तोमर के मार्ग निर्देशन में कृषि विज्ञान केंद्र कटनी द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र एवं आत्मा परियोजना की संयुक्त तत्वाधान मैं मधुमक्खी पालन विषय पर कृषकों हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ संजय वैशंपायन संचालक विस्तार सेवाएं के द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम दिया गया डॉ संजय वैशंपायन वरिष्ठ वैज्ञानिक ने किसानों को मधुमक्खी पालन की तकनीक उस में रखने वाली सावधानियां एवं आय में दोगुनी करने हेतु मधुमक्खी पालन की महत्वता पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी और केंद्र के वैज्ञानिकों ने कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित मधुमक्खी पालन विषय पर प्रशिक्षण दिया एवं मधुमक्खी पालन की विभिन्न तकनीकी उसका महत्व एवं बाजार व्यवस्था तथा मधुमक्खी पालन में की जाने वाली सावधानियों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विस्तार पूर्वक जानकारी दी कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ ए.के दुबे डॉ आर के मिश्रा डॉ आर. पी बेन डॉ अर्पिता श्रीवास्तव डॉ के पी द्विवेदी की उपस्थिति में एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया प्रशिक्षण कार्यक्रम में कटनी जिले के विभिन्न ग्रामों के प्रगतिशील किसान ने भाग लिया जिसमें किसानों ने वैज्ञानिकों द्वारा बताई गई तकनीकी को सुना और मधुमक्खी पालन के महत्व के बारे में जानकारी प्राप्त की कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ ए.के तोमर ने मधुमक्खी पालन से होने वाली आय एवं किसानों की दुगनी आय में वृद्धि हेतु एक बहुत ही सफल स्वरोजगार के बारे में जानकारी दी एवं उसके भंडारण के बारे में संपूर्ण तकनीकी विस्तार से बताएं कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर ए के दुबे डॉ आर के मिश्रा डॉ अर्पिता श्रीवास्तव डॉ आर बेन डॉक्टर के पी द्विवेदी ने भी मधुमक्खी मधुमक्खी पालन से संबंधित तकनीकी और उसके महत्व पर प्रकाश डाला समस्त किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र में आयोजित कृषि विज्ञान केंद्र एवं आत्मा परियोजना से जो कार्यक्रम प्रशिक्षण किया गया उसके लिए किसानों ने अपने सुझाव दिए और वैज्ञानिकों से कहा कि समय-समय पर और प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को दिए जाएं और जो जानकारी दी गई है वैज्ञानिकों द्वारा वह किसानों के लिए बहुत ही सारगर्भित रही



