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धर्म रक्षक बाल व्यास मानस महाराज ने बताया करोना पर महामंत्र

विशेष मंत्रों के साथ ही आहुति देनी चाहिए यदि मंत्र नहीं आते हैं तो उन्हें सीखने का प्रयास करें और बिना मंत्रों के भी वायरस को भगाने के लिए हवन करें क्योंकि मुख्य काम वायरस तथा ऐसी विषैली गैसों को भगाने का है जो मानव जीवन के लिए खतरा बन जाते हैं। मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है इसकी रक्षा मुख्य है।
यदि आज समूचे विश्व में मांसाहार समाप्त हो जाए और प्रत्येक घर में यज्ञ होने लगे तो अस्पतालों की संख्या समाप्त हो जाएगी। जीवन सुख शांति तथा आनंदमय हो यही यज्ञ का उद्देश्य होता है।
बाल व्यास जी महाराज ने कहा प्राचीन भारतीय संस्कृति में और ऋषि-मुनियों से लेकर सद्गृहस्थों, वटुक-ब्रह्मचारियों तक नित्य प्रति किया करते थे। प्रातः और सायं यज्ञ करके संसार के विविध रोगों का निवारण करते थे। ब्रह्मवर्चस शोधसंस्थान की किताब ‘यज्ञ चिकित्सा’ में बताया गया है कि यज्ञों का वैज्ञानिक आधार है और धर्म रक्षक बाल व्यास मानस जी महाराज ने बताया यज्ञों के माध्यम से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ उठाया जा सकता है और विभिन्न रोगों से छुटकारा भी पाया जा सकता है। इतना ही नहीं संपूर्ण वैज्ञानिक एवं वैदिक विधि से किए गए यज्ञ से वृक्ष-वनस्पतियों की अभिवृद्धि भी की जा सकती है। यज्ञ अनुसंधान वैज्ञानिक अध्यात्मवाद की एक शोध शाखा है।
इन आदतों से होता है धन का नाश, देखिए आप में भी तो नहीं-शारीरिक रोगों के साथ ही मानसिक रोगों मनोविकृतियों से उत्पन्न विपन्नता से छुटकारपाने के लिए यज्ञ चिकित्सा से बढ़कर अन्य कोई उपयुक्त उपाय-उपचार नहीं है। विविध अध्ययन, अनुसंधानों एवं प्रयोग परीक्षण द्वारा ऋषि प्रणीत यह तथ्य अब सुनिश्चित होता जा रहा है।
यज्ञोपैथी: यह एक समग्र चिकित्सा की विशुद्ध वैज्ञानिक पद्धति है, जो एलोपैथी, होम्योपैथी आदि की तरह सफल सिद्ध हुई है। ब्रह्मवर्चस ने लिखा है, ‘भिन्न भिन्न रोगों के लिए विशेष प्रकार की हवन सामग्री प्रयुक्त करने पर उनके जो परिणाम सामने आए हैं, वे बहुत ही उत्साहजनक हैं। यज्ञोपैथी में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि आयुर्वेद में जिस रोग की जो औषधि बताई गई है, उसे खाने के साथ ही उन वनौषधियों को पलाश, उदुम्बर, आम, पीपल आदि की समिधाओं के साथ नियमित रूप से हवन किया जाता रहे, तो कम समय में अधिक लाभ मिलता है।

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