खंडहर में तब्दील होता जा रहा मुख्यालय में स्थित,उप-संचालक कृषि कार्यालय

नंदकिशोर ठाकुर,डिंडोरी ब्यूरो। जिला मुख्यालय में स्थित उप-संचालक कृषि कार्यालय भवन अब धीरे-धीरे खंडार में तब्दील होता जा रहा है। ताजा हालात यह है कि भवन के चारों ओर खरपतवार उग आएं हैं, खपरैल वाली कृषि कार्यालय भवन के पिछले कई वर्षों से मरम्मत भी नहीं कराई गई। बताया गया कि भवन की स्थिति जर्जर होने के कारण बरसात का पानी कृषि कार्यालय के अंदर भरता है, बावजूद विभागीय जिम्मेदारों द्वारा कृषि कार्यालय के लिए पक्की भवन का निर्माण कार्य कराए जाने कोई पहल नहीं की गई। जिससे अवस्थाओं के बिच ही कृषि कार्यालय का संचालन पिछले कई वर्षों से हो रहा है, जिसे लेकर अब लोगों ने सवाल उठाना भी शुरू कर दिए गए हैं। गौरतलब है कि कृषि कार्यालय के लिए पक्की भवन ना होने से कार्यालय में अव्यवस्था हावी है, प्रचार प्रसार की सामग्रियां या फिर शासकीय रिकॉर्डो का संधारण करने में परेशानी हो रही है। कार्यालय में सीमित स्टाफ की संख्या है, जहां न तो बैठने की कोई उचित व्यवस्था है और ना ही रिकॉर्ड, प्रचार-प्रसार सामग्री सहित अन्य का संधारण करने के कोई पुख्ता इंतजाम। आरोप है कि अव्यवस्थाओं के बिच ही उप संचालक कृषि कार्यालय का संचालन वर्षों से कराया जा रहा है, बावजूद भवन की मरम्मत या फिर नवनिर्मित भवन का निर्माण कार्य कराया जाने कोई पहल नहीं की जा रही।
कार्यालय में खड़े वाहनों की नीलामी व सुधार कार्य करने नहीं हो रही पहल :- कृषि उपसंचालक व परियोजना संचालक कार्यालय मैं लगभग आधा दर्जन सरकारी वाहन खड़े-खड़े कंडम हो रहे हैं। बताया गया कि इन सरकारी वाहनों की न तो नीलामी प्रक्रिया कि जा रही है और ना ही इन वाहनों की सुधार कार्य करने पिछले लंबे समय से कोई पहल नहीं की जा रही। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता न होने के कारण दिनोंदिन लाखों रुपए के सरकारी वाहन और भी ज्यादा खस्ताहाल होते जा रहे हैं। आरोप है कि देख-रेख व सुरक्षा के अभाव में वाहनों की हालत काफी जर्जर होती जा रही है, बावजूद कार्यालय में पदस्थ जिम्मेदारों के द्वारा वाहनों मैं सुधार कार्य कराने या वाहनों की नीलामी कराने कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही। जिम्मेदारों के द्वारा जिले में कृषि को बढ़ावा देने व किसानों को प्रोत्साहन करने सहित कृषि संबंधी प्रचार प्रसार करने में काफी लापरवाही की जाती है, जिसे लेकर अब लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिए हैं। बताया गया कि कृषि कार्यालय में खड़े कंडम वाहनों की नीलामी प्रक्रिया ना होने से शासन के राजस्व को लाखों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जबकि सरकारी वाहनों की नीलामी प्रक्रिया कर राजस्व में बढ़ोतरी की जा सकती है या फिर इन्हीं सरकारी वाहनों के सुधार कार्य करके विभागीय कार्य में उपयोग भी किया जा सकता है। बावजूद वाहनों कि सुधार कार्य करने व नीलामी प्रक्रिया कराए जाने में विभागीय अमला कोई ध्यान नहीं दे रहा।



