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पैसा न होने के कारण मेरे बेटे को अस्पताल प्रबंधन ने बंधक बना लिया कृपया मेरी मदद करे साहब

जबलपुर दर्पण नगर संवाददाता। कलेक्टर कर्मवीर शर्मा जैसे ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की वीडियों कॉन्फ्रेंस करने के बाद अपने चेंबर में जा रहे थे अचानक उनकी नजर मार्गदर्शन कक्ष में बैठी एक महिला एवं उसके साथ खड़े युवक पर पड़ी श्री शर्मा उनके पास पहुंचकर कार्यालय में रात के समय आने का कारण पूछा तो सिया बाई ने रोते हुए बताया कि साहब मैं ग्राम डुंगरिया करेली की निवासी हूं तथा मेरा पुत्र मोहन जाटव उम्र 26 जो कि मेनिनजाइटिस बीमारी से ग्रसित होने के कारण उपचार के लिए जबलपुर के एक निजी हॉस्पिटल में भर्ती था मेरे द्वारा एडमिट के समय अस्पताल प्रबंधन को 70,000 रू दे दिया था किन्तु अस्पताल ने डिस्चार्ज करने के लिये मुझे 1,20,000 रू का बिल धमा दिया इतनी राशि देने में असमर्थ हूं। जिसके कारण मेरे मरीज को बंधक बनाकर रखे हुए हैं। प्लीज सर आप मेरी मदद करे परिजनों की ऐसी दयनीय हालत को देखते हुए कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने फोन पर सीएमएचओ डॉ रत्नेश कुरारिया को निर्देश दिया कि तत्काल मामले का निराकरण करें मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमएचओ ने निजी अस्पताल की निगरानी के लिए नियुक्त डॉ प्रियंक दुबे नोडल अधिकारी को आदेशित किया श्री दुबे ने अस्पताल पहुंचकर प्रबंधक और मरीज के परिवार के बीच समन्वय बनाते हुए मरीज को डिस्चार्ज करवाया एवं परिवार से बात की तो उन्होने बताया कि हमारे पास मात्र दस हजार रू है। नोडल अधिकारी डा.दुबें ने अस्पताल प्रबंधक से चर्चा करके 1,20,000 में से 1,00,000 रू कम करवाया और कलेक्टर साहब को फोन करके वस्तुस्थिति की जानकारी दी सुनकर कलेक्टर कर्मवीर शर्मा ने 10,000 रूपये की सहायता रेडक्रांस से मदद की,

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