डिंडोरी दर्पणमध्य प्रदेश

बीमारी से हुई मौत को जिला अस्पताल प्रबंधन ने बता दिया कोरोना से मौत

  • जिला अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही आई है सामने।
  • परिजनों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

डिंडोरी दर्पण ब्यूरो। जिले के डिंडोरी जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मड़ियारास निवासी मृतक गणेश राठौर की मृत्यु को कोरोना से मृत्यु होना अस्पताल प्रबंधन द्वारा बताया गया है, जिसके बाद परिजनों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही माना है, परिजनों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है। मामले को लेकर पिछले दिनों अस्पताल प्रबंधन द्वारा कोरोना से मौत होने की पुष्टि के बाद से ही परिजन आश्चर्य है और मामले की जांच कराकर अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है,भारतीय जन शक्ति चेतना पार्टी की अगुवाई में परिजनों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है।

  • मृतक के शरीर पर मिले चिरफाड करने के निशान। मृतक गणेश राठौर के बेटा गुप्तेश्वर राठौर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनके पिता लंबे समय से अस्थमा के बीमार थे, जिन्हें सांसे लेने में तकलीफ होती थी। 6 अक्टूबर को अचानक तबीयत ज्यादा खराब होने पर मृतक गणेश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बिना जांच रिपोर्ट आए ही मृतक को 8 अक्टूबर को जबलपुर रेफर कर दिया गया। आरोप है कि जहां मृतक गणेश के सही तरीके से इलाज नहीं की गई, जिस कारण 15 अक्टूबर को उनकी मौत हो गई।जानकारी लगने पर परिजन व उनके पुत्र गुप्तेश्वर शमशान सुधार समिति जबलपुर पहुंचे जहां देखा कि उनके पिता के शरीर पर कई जगह चीरफाड़ करने के निशान मिले हैं,जिससे शंका जाहिर होती है कि मृत शरीर से शारीरिक अंग निकाले गए हैं। बाद में कोरोना प्रोटोकाल के हिसाब से उनका दाह संस्कार जबलपुर में ही कर दिया गया।
  • कोरोना से हुई मौत तो पोस्टमार्टम क्यों।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमित पाए जाने पर परिजनों को भी कोरोना टेस्ट करवाना जरूरी होता है और अगर कोरोनावायरस से किसी व्यक्ति की अगर मौत हो जाती है तो उसके पोस्टमार्टम करने की दिशा निर्देश नहीं है। लेकिन यहां सवाल यह उठता है कि जब मड़ियारास निवासी मृतक गणेश राठौर कोरोनावायरना पॉजिटिव पाए गए थे तब उनके परिजनों की कोरोना टेस्ट क्यों नहीं करवाई गई और अगर कोरोना से ही मौत हुई है तो उनके शरीर पर चीरफाड़ कलने के निशान क्यों मिले। इससे साफ होता है कि जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा बड़ी लापरवाही की गई है,अस्थमा के मरीज को कोरोनावायरस के मरीज बताकर जबलपुर रेफर कर दिया गया, जबलपुर अस्पताल में भी सही इलाज ना होने के अभाव में उनकी मृत्यु हो गई एवं उनके शरीर में चिरफाड़ करने से जाहिर होता है कि शारीरिक अंग को निकाला गया है,मामले को लेकर परिजनों ने निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

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