धान खरीदी केन्द्रों में बारिश से हजारों टन अनाज हुआ गीला:प्रशासन मौन

जबलपुर दर्पण नगर संवाददाता पाटन: मौसम के पूर्वानुमान के बावजूद भी जिला प्रशासन एवं पाटन तहसील में बैठे उच्च अधिकारी सभी अपने कार्यलय में इस सर्दी के मौसम में आराम करते दिख जाएंगे जबकि पाटन तहसील के किसान अपनी धान को लेकर परेशान है। एक ओर जहां पवन एग्रो मार्केटिंग एंड ग्रेडिंग यूनिट मेढ़ी खरीदी केंद्र में खरीदी बंद है। खरीदी केंद्र संचालक के द्वारा बताया गया कि बारिश के कारण प्रशासन के द्वारा खरीदी बंद की हुई है। जब इस संबंध में प्रशासनिक आदेश दिखाने की बात की गई तो केंद्र संचालक बगले झांकते नजर आए एवं इस केंद्र में हजारों कुंटल धान खुले में पड़ी है। एवं प्रशासन को दिखाने के लिए ऊपर से थोड़ी बहुत त्रिपाल डाल कर रखी हैं। उन तिरपालों का उपयोग सिर्फ दिखाने के लिए है जबकि धान बहुत अधिक मात्रा में बारिश के कारण गीली हो गई है। केंद्र के द्वारा यह भी बताया गया कि जिन किसानों का रजिस्ट्रेशन इस केंद्र में है। उन सभी गांव में कोटवारों के द्वारा मुनादी करा दी गई है। आगामी आदेश तक खरीदी बंद है। जब इस बात की जांच की गई तो पाया गया किसी भी गांव में इनके एवं प्रशासन के द्वारा कोई मुनादी नहीं कराई गई है। हजारों टन वारिस से भीगी धान की जवाबदारी किसकी है। क्या शासन के नुकसान की भरपाई खरीदी केन्द्र या फिर परिवहन ठेकेदार से इस की राशि वसूली जायगी
परिवहन ठेकेदार की मनमर्जी पर प्रशासन नतमस्तक —परिवहन की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। ठेकेदार की ही मनमर्जी चलती है। उसकी गलती से हर साल हजारों लाखों टन अनाज ख़राब होता है-प्रशासकीय अधिकारी क्यों नत मस्तक होकर उसकी मनमर्जी देखते हैं। यह समझ के परे है। इनके ऊंचे रसूख के कारण अधिकारी भी कार्यवाही करने से डरते हैं। प्रशासन और ठेकेदार की मिलीभगत से इंकार नहीं किया जा सकता, गीला और ख़राब अनाज को कम कीमत पर बेचकर कुछ व्यवसायियों को लाभ पहुँचाने और उनसे बदले में बड़ी राशि ठेकेदार और शासकीय अमले के बीच ही बंदर बाट की जाती है। यही हाल मेकलसूता वेयर हाउस गुरु पिपरिया पाटन का है। इस खरीदी केंद्र में भी हजारों टन धान बारिश के कारण गीली हो गई और गीली धान का परिवहन किया जा रहा है। केंद्र संचालकों के लिए अच्छी बात यह है कि धान का वजन अपने आप पानी के कारण बढ़ गया इस बढ़त वाली धान का बंदरबांट सभी के बीच में बराबर से हो जाएगा



